माँ अन्नपूर्णा स्मृति स्थल, सराया गुलबराय, नगरा, जिला बलिया, उत्तरप्रदेश (भारत) 221711

डॉ.दिलीप कुमार चौहान बागी बच्चों के बीच मे

निःशुल्क कॉपी, कलम एवं पुस्तक वितरण,

रामपुर, नगरा - बलिया

निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कैंप।

नवीनतम गतिविधियां
NEW साहित्य उन्नयन संघ — एक दृष्टि, एक अभियान | माँ अन्नपूर्णा देवी के अधूरे सपनों को पूरा करने की दिशा में एक अडिग कदम | हम विभिन्न कार्यक्रमों — कवि सम्मेलन, जागरूकता अभियान, विचार संगोष्ठी, निःशुल्क शिक्षण सामग्री वितरण, स्वास्थ्य शिविर, वृक्षारोपण, श्रमदान, | NEW साहित्य उन्नयन संघ — एक दृष्टि, एक अभियान | माँ अन्नपूर्णा देवी के अधूरे सपनों को पूरा करने की दिशा में एक अडिग कदम | हम विभिन्न कार्यक्रमों — कवि सम्मेलन, जागरूकता अभियान, विचार संगोष्ठी, निःशुल्क शिक्षण सामग्री वितरण, स्वास्थ्य शिविर, वृक्षारोपण, श्रमदान, |
साहित्य उन्नयन संघ — एक दृष्टि, एक अभियान
हमारे बारे में

साहित्य उन्नयन संघ — एक दृष्टि, एक अभियान

माँ अन्नपूर्णा देवी के अधूरे सपनों को पूरा करने की दिशा में एक अडिग कदम

साहित्य उन्नयन संघ की स्थापना वर्ष 2024 में हुई। यह संगठन माँ अन्नपूर्णा देवी की प्रेरणा से जन्मा है, जिन्होंने उत्तर प्रदेश से लेकर असम तक हजारों गरीब, असहाय एवं लाचार परिवारों के सामाजिक, आर्थिक एवं नैतिक अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया।

संघ साहित्यिक एवं सामाजिक सेवा के माध्यम से एक आदर्श समाज की स्थापना हेतु प्रतिबद्ध है। हम विभिन्न कार्यक्रमों — कवि सम्मेलन, जागरूकता अभियान, विचार संगोष्ठी, निःशुल्क शिक्षण सामग्री वितरण, स्वास्थ्य शिविर, वृक्षारोपण, श्रमदान, कन्या-विवाह सहायता एवं सम्मान समारोह — के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने का प्रयास करते हैं।

और जानें →
हमारा उद्देश्य

हमारा लक्ष्य और हमारी दृष्टि

🎯

हमारा लक्ष्य

साहित्यिक एवं सामाजिक सेवा के माध्यम से राष्ट्र व विश्व को मजबूती प्रदान करना। गरीब, असहाय एवं वंचित वर्ग के सामाजिक, आर्थिक व नैतिक अधिकारों की रक्षा करना तथा एक आदर्श समाज का निर्माण करना।

👁️

हमारी दृष्टि

एक ऐसा समाज जहाँ साहित्य और सेवा एक-दूसरे के पूरक हों; जहाँ प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान की समान सुविधा प्राप्त हो — माँ अन्नपूर्णा देवी के सपनों का भारत।

हमारे प्रमुख कार्यक्रम

साहित्य, सेवा और संस्कार — हमारे कार्यक्षेत्र

शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक, साहित्य से लेकर समाज सेवा तक — हर दिशा में सक्रिय

📚

निःशुल्क शिक्षण सामग्री

कॉपी, कलम, किताब का वितरण। लक्ष्य: 1 लाख बच्चे। अब तक 10,000+ बच्चों को लाभ।

💍

कन्या-विवाह सहायता

अनाथ एवं असहाय कन्याओं के विवाह में सहयोग।

🏥

निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर

झुग्गी-झोपड़ियों एवं मलिन बस्तियों में नि:शुल्क स्वास्थ्य जाँच।

🎤

कवि सम्मेलन

शहर से गाँव तक साहित्यिक आयोजन; नवांकुर कवियों को मंच।

💬

विचार गोष्ठी

सामाजिक एवं राजनीतिक विषयों पर चर्चा और समाधान।

🌳

वृक्षारोपण अभियान

पर्यावरण संरक्षण हेतु व्यापक वृक्षारोपण।

📢

जागरूकता अभियान

शिक्षा, नशा उन्मूलन, बालश्रम, स्वास्थ्य विषयक अभियान।

🏆

सम्मान समारोह

साहित्य गौरव सम्मान, माँ अन्नपूर्णा समाज सेवा सम्मान का आयोजन।

हमारा प्रभाव

उत्तर प्रदेश से पूरे भारत तक — हमारी पहुँच

17 जिलों और 10+ राज्यों में सक्रियता

0
जिलों में सक्रिय (उ.प्र.)
0
भारतीय राज्यों में उपस्थिति
0
बच्चों को निःशुल्क शिक्षण सामग्री
0
कार्यक्रम आयोजित

साहित्य उन्नयन संघ उत्तर प्रदेश के बलिया, मऊ, गाजीपुर, महराजगंज, आजमगढ़, बनारस, लखनऊ, जौनपुर, बस्ती, देवरिया, गोरखपुर, चंदौली, प्रतापगढ़, प्रयागराज, कुशीनगर, बदायूं एवं गाजियाबाद सहित असम, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, बिहार, पश्चिम बंगाल, केरल, त्रिपुरा व हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में सक्रिय है।

सम्मान एवं पुरस्कार

साहित्य और सेवा का सम्मान — हमारी पहचान

संघ द्वारा प्रदत्त प्रतिष्ठित सम्मान जो साहित्य एवं समाज सेवा की उत्कृष्टता को रेखांकित करते हैं

🏅 साहित्य गौरव सम्मान

साहित्य के क्षेत्र में

नगद धनराशि, अंग वस्त्र, स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र सम्मिलित

🏅 माँ अन्नपूर्णा सामाजिक सेवा सम्मान

समाज सेवा के क्षेत्र में

नगद धनराशि, अंग वस्त्र, स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र सम्मिलित

✨ साहित्य सृजन सम्मान

साहित्य

अंग वस्त्र, स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र सम्मिलित

✨ सामाजिक उन्नयन सम्मान

समाज सेवा

अंग वस्त्र, स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र सम्मिलित

✨ ज्ञान कुंज सम्मान

शिक्षा

अंग वस्त्र, स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र सम्मिलित

सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित विशिष्टजन

📜

डॉ. हारून रशीद

साहित्य गौरव सम्मान — 2024

प्रख्यात साहित्यकार एवं वार्ताकार

📜

श्री सरत सोनकर

साहित्य गौरव सम्मान — 2025

प्रख्यात उपन्यासकार एवं प्रशासनिक अधिकारी

हमारी टीम

हमारे मार्गदर्शक एवं पदाधिकारी

समर्पित नेतृत्व, जो सेवा को जीवन का उद्देश्य मानता है

डॉ. दिलीप कुमार चौहान "बागी"

डॉ. दिलीप कुमार चौहान "बागी"

संस्थापक अध्यक्ष

लेखक, कवि, अध्यापक एवं समाजसेवी

📞 +91 6393415997
डॉ. अजय कुमार सिंह

डॉ. अजय कुमार सिंह

मुख्य संरक्षक

प्रोफेसर, पी. जी. कॉलेज — गाजीपुर

📞 +91 95068 52700
श्रीमती ज्योति वर्मा

श्रीमती ज्योति वर्मा

मुख्य कार्यक्रम संयोजक

समाजसेविका

आयोजन एवं गतिविधियाँ

हमारे आगामी एवं हालिया आयोजन

साहित्य, समाज सेवा एवं जागरूकता — हर आयोजन एक कदम बेहतर समाज की ओर

📅 शीघ्र घोषित

कवि सम्मेलन 2025

📍 उत्तर प्रदेश

नवांकुर एवं स्थापित कवियों का साहित्यिक मंच। विषय शीघ्र घोषित किया जाएगा।

📅 शीघ्र घोषित

निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर

📍 ग्रामीण क्षेत्र, उ.प्र.

झुग्गी-झोपड़ियों एवं मलिन बस्तियों में नि:शुल्क स्वास्थ्य जाँच अभियान।

📅 शीघ्र घोषित

सम्मान समारोह 2025

📍 शीघ्र घोषित

साहित्य गौरव सम्मान एवं माँ अन्नपूर्णा समाज सेवा सम्मान का वार्षिक आयोजन।

📸 कवि सम्मेलन गैलरी

कवि सम्मेलन स्थान
बाबा गंगादास बालिका इंटर कॉलेज, गाजीपुर

हमारे कवियों की — चुनिंदा रचनाएँ

"
कभी घर की मर्यादा ऊँचा उठाती
कभी बोझी नैय्या डुबाती हैं बेटी।
कभी बहन तो कभी माँ और पत्नी
हर रूप में श्रेष्ठ मानी जाती हैं बेटी।
डॉ. दिलीप कुमार चौहान संस्थापक अध्यक्ष — साहित्य उन्नयन संघ
"
तन्हाई का कारवाँ और बारात थी परछाई की ,फरेबी की धुन्ध में वह बिम्ब थी सच्चाई की।
-
- दिलीप कुमार चौहान संस्थापक अध्यक्ष — साहित्य उन्नयन संघ
"
खेतों में बैलों की जोड़ी मुस्काते खेत - खलिहान,चारो पहर हो व्याकुल खड़े स्वागत को सिवान।
दिलीप कुमार चौहान संस्थापक अध्यक्ष — साहित्य उन्नयन संघ
"
बेटों के लोभियों से कोई तो पूछे कोंख में ही क्यों मारी जाती हैं बेटी। दहेज के लिए कहीं जलाई हैं जाती फन्दों पर कहीं झुलाई जाती हैं बेटी।
दिलीप कुमार चौहान संस्थापक अध्यक्ष — साहित्य उन्नयन संघ
📖 हमारी कहानियाँ

ताज़ा समाचार और कहानियाँ

साहित्य उन्नयन संघ की गतिविधियों, आयोजनों और समाज सेवा की कहानियाँ

1 min read

(कविता) उफ! वे चुनार के कठोर पत्थरहथौड़ा थामे मलिन कमजोर औरत।धू-धूकर जलती धूप भीषण पसीने की बौछारपत्थर के हर टुकड़े…

1 min read

(बेटी)कभी फूलमाला, कभी अग्निज्वालाकभी घर की लक्ष्मी कहाती हैं बेटी।कभी रणचण्डी, कभी झाँसी वालीकभी रण में तेगा चलाती  हैं बेटी।…

1 min read

( मेरा गाँव) गीत पिक के, काक के काँव – काँवबट वृक्ष के छाँव,सरसों के पीत पुलकित पुष्पसरिता में विहसित…

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अपना समय और कौशल समाज सेवा में लगाएँ। साहित्य उन्नयन संघ के साथ जुड़ें और बदलाव का हिस्सा बनें।

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📞 संपर्क: 6393415997 | डॉ. दिलीप कुमार चौहान "बागी" (संस्थापक अध्यक्ष)

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